करोंदा
करोंदा - करोंदा फलों का उपयोग सब्जी और अचार बनाने में किया
जाता है । यह पौधा भारत में राजस्थान, गुजरात, उत्तरप्रदेश और हिमाचल के क्षेत्रों
में पाया जाता है । दो साल के पौधे में फल आने लगते हैं और जुलाई से सितम्बर के
बीच फल पक जाता है । इसके फूलों की गन्ध जूही के समान होते हैं । इसके फल गोल,
छोटे और हरे रंग के होते हैं । पकने पर यह काले रंग के होते है ।
करोंदा का वैज्ञानिक नाम कैरिसा कैरंडस है । रंग -
करोंदा का रंग सफेद, स्याह, सुर्ख और हरा होता है , स्वाद - करोंदा का स्वाद खटटा
होता है , स्वभाव - करोंदा की तासीर गरम होती है , .हानिकारक - करोंदा रक्त पित्त
और कफ को उभारते हैं
.दोषों को दूर करने वाला - करोंदा
में व्यास दोषों को नमक, मिर्च और पीठे पदार्थ दूर हो जाते हैं ।
करोंदे का उपयोग - कच्चे करोंदे का
अचार बहुत अच्छा होता है इसकी लकड़ी जलाने के काम आती है । एक विलायती करौंदा भी
होता है जो भारतीय बगीचों में पाया जाता है । इसका फल थोड़ा बड़ा होता है और देखने
में सुन्दर भी । इस पर कुछ सुर्खी सी होती है ।
इसी को आचार और चटनी के काम में
ज्यादा लिया जाता है । करोंदा भूख बढ़ाता है और पित्त को शान्त करता है । प्यास को
रोकता है, दस्तों को बन्द करता है । खासकर पैत्तिक दस्तों के लिये तो अत्यन्त ही
लाभदायक चीज है कच्चे करोंदा भूख को बढ़ाते है, भारी होते हैं, मल को रोकते है और
रूची को उत्पन्न करते है और पके हुए हल्के रीगल, पित्त, रक्त, पित्त त्रिदोष और
विष तथा वात विनाशक है ।
No comments:
Post a Comment